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 जानेमन जेल | Janeman Jail




जानेमन जेलपुस्तक भड़ास के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह द्वारा लिखित संस्मरण एक हैं, जो जनवरी 2013 में प्रकाशित हुई। जानेमन जेलमें यशवंत सिंह ने अपने नॉएडा जेल जाने और डासना जेल में गुजरे हुये दिनो के बारे में लिखा है।

               जानेमन जेलपुस्तक की भाषा आम बोलचाल बली भाषा है, जिसे पढने मे बहुत अच्छा लगता है, ये किताब जेल के अन्दर रहने बाले कैदियों की दिनचर्या व उन की मनोदशा से रूबरू करने के साथ – साथ जेल के अन्दर बोले जाने वाले शब्दों से परिचित करती है, ये इस पुस्तक का सबसे अच्छा भाग लगता है।

               जो लोग ये सोचते है कि जेल के अन्दर का जीवन दु:खद, कष्टकारी, नीरस लगता है, वो इस किताब को जरुर पढ़े, क्योकि इस किताब को पढने के बाद ऐसा लगता है कि असली जीवन तो जेल के अंदर ही है, कुछ दिन तो गुजार के आया जाये।

   

-:किताब से ली गई कुछ अच्छी लाइन:-


"आपको जेल भेजने का मतलब दंडित करना नहीं बल्कि सुधार कर समाज की मुख्यधारा में शामिल करना उद्देश्य हैं   "


"बड़े से बड़ा आदमी अपने एकांत में अपने कई सारे दुखो तनावों के कारण रोता -डरता -कलपता हैं  "


"आज के जमाने में साफ-साफ बोलना दरअसल सबसे बड़ा हिम्मत का काम करना हैं ।"


"अलग चलने वाला आदमी अपना रास्ता खुद बनाना होता हैं ।"


"डर-डर कर रोज मुर्दा की तरह जिन्दा रहने से अच्छा हैं, जिन्दगी  को उत्सव के साथ बेख़ौफ़  होकर जिया जाय और सिर्फ एक बार तब मरा जाये जब मौत आ जाये या दे दी जाये ।"


जब आप डर से डरना बंद कर देते हैं, तो फिर मौत की भी हिम्मत आसपास फटकने की नहीं होती ।"


"पत्रकार, डाक्टर और पुलिस इन पेशों में फोन आने और जाने का कोई वक्त नहीं होता ।"


"गुरुर, घमंड, सत्ता मद से जितना बच सकें उतना ही अच्छा "


"भ्रष्ट लोग बार-बार मरते रहते हैं क्योकि असल में वो जिन्दगी ही दुसरो के कंधो पर पैर रखकर, दूसरों को अपनी बैसाखी बनाकर गुजरते हैं ।" 


Book  Details


Book Name: जानेमन जेल (Janeman Jail) 

Publisher  :  Hind Yugm; First edition (1 January 2013)

Language  :  Hindi

ISBN-10  :  9381394520

ISBN-13  :  978-9381394526

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